Question:

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए: (i) 'मैंने देखा एक बूँद' कविता में समुद्र के झाग के मध्य से उठी एक छोटी बूँद से कवि को किस सत्य के दर्शन होते हैं? (ii) 'तोड़ो' कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए। (iii) तुलसी के पद 'रहि चकि चित्रलिखी सी' का भाव अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

Show Hint

बूँद के 'आलोक-छुआ अपनापन' को नश्वरता से मुक्ति के रूप में समझें। 'चित्रलिखी सी' कौशल्या की वह दशा है जब उन्हें राम के वनगमन की याद आती है।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का स्वरूप:
तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-40 शब्दों में लिखने हैं। यहाँ तीनों के नमूना उत्तर हैं।

चरण 2: उत्तर (i) बूँद से कवि को किस सत्य के दर्शन:
अज्ञेय की कविता में समुद्र के झाग से एक बूँद सहसा उछलती है और क्षण भर के लिए ढलते सूरज की आग से रँग जाती है।
इसे देखकर कवि को सत्य दिखता है कि सूने विराट के सामने हर 'आलोक-छुआ अपनापन' नश्वरता के दाग से उन्मोचन यानी मुक्ति है। क्षण भर का प्रकाशित जीवन भी मिटने के भय से मुक्त और सार्थक है।

चरण 3: उत्तर (ii) 'तोड़ो' का प्रतिपाद्य:
रघुवीर सहाय की 'तोड़ो' उद्बोधनपरक कविता है। कवि सृजन के लिए पत्थर, चट्टान, झूठे बंधन, ऊसर और बंजर तोड़कर खेत बनाने का आह्वान करता है। वह विध्वंस के लिए नहीं, सृजन के लिए प्रेरित करता है।
यही बात मन पर भी लागू है - मन की ऊब और खीज को भी तोड़-गोड़कर उसे उपजाऊ बनाना है।

चरण 4: उत्तर (iii) 'रहि चकि चित्रलिखी सी' का भाव:
गीतावली के पद 'जननी निरखति बान धनुहियाँ' में राम के वन जाने के बाद माता कौशल्या कभी उन्हें सवेरे जगाने जाती हैं, कभी राजा के पास जाने को कहती हैं।
पर जब उन्हें याद आता है कि राम तो वन चले गए हैं, तो वे चकित होकर चित्र में बनी आकृति की तरह स्तब्ध और निश्चल रह जाती हैं। इसमें माँ के गहरे वात्सल्य और विरह-वेदना का भाव है।

अंतिम उत्तर:
किन्हीं दो उत्तरों को लगभग 40-40 शब्दों में लिखें।
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