Question:

निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए: यह मधु है - स्वयं काल की मौना का युग संचय, यह गोरस-जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत-पय, यह अंकुर-फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय, यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुतः इसको भी शक्ति दे दो। यह दीप, अकेला, स्नेह भरा है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

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दीप व्यक्ति का और पंक्ति समाज का प्रतीक है। मधु, गोरस और अंकुर तीनों प्रतीकों के अर्थ बताकर 'इसको भी पंक्ति को दे दो' का भाव लिखिए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ और प्रसंग:
ये पंक्तियाँ अज्ञेय की कविता 'यह दीप अकेला' से ली गई हैं, जो 'अंतरा भाग 2' में संकलित है। कविता में अकेला दीप व्यक्ति का और पंक्ति समाज का प्रतीक है। इस अंश में कवि व्यक्ति की विशेषताएँ मधु, गोरस और अंकुर के प्रतीकों से बताता है और उसे समाज की शक्ति से जोड़ने की बात करता है।

चरण 2: व्याख्या:
कवि कहता है कि यह व्यक्ति ऐसा मधु है, जिसे स्वयं समय ने युगों तक सँजोकर इकट्ठा किया है, यानी इसमें युगों का अनुभव है। यह जीवन रूपी कामधेनु का अमृत जैसा पवित्र दूध (गोरस) है, जो जीवन को पोषण देता है। यह वह अंकुर है जो धरती को फोड़कर निकलता है और बिना डरे सूर्य की ओर देखता है, यानी इसमें साहस और जीवन-शक्ति है। यह स्वाभाविक है, स्वयं उत्पन्न है और ब्रह्म के समान है। कवि कहता है कि इसे भी सामूहिक शक्ति को सौंप दो। यह दीप अकेला है, स्नेह से भरा है, गर्व से भरा और मदमाता है, फिर भी इसे पंक्ति में स्थान दे दो।

चरण 3: विशेष:
1. मधु, गोरस और अंकुर व्यक्ति के गुणों के प्रतीक हैं।
2. 'स्नेह' में श्लेष है: दीप के लिए तेल और व्यक्ति के लिए प्रेम।
3. भाषा तत्सम-प्रधान है और व्यष्टि के समष्टि में विलय का भाव है।

अंतिम उत्तर:
कवि के अनुसार व्यक्ति गुणों और शक्ति से भरा है, फिर भी उसकी सार्थकता तभी है जब वह समाज की पंक्ति और उसकी शक्ति से जुड़े।
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