Question:

निम्नलिखित काव्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए: यह जन है - गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा ? पनडुब्बा - ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा ? यह समिधा - ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा। यह अद्वितीय - यह मेरा - यह मैं स्वयं विसर्जित - यह दीप, अकेला, स्नेह भरा है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

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दीप को व्यक्ति और पंक्ति को समाज का प्रतीक मानिए। जन, पनडुब्बा और समिधा के अर्थ बताकर 'इसको भी पंक्ति को दे दो' का भाव लिखिए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: व्याख्या का ढाँचा:
सप्रसंग व्याख्या में पहले संदर्भ और प्रसंग, फिर व्याख्या और अंत में विशेष लिखा जाता है। शब्द-सीमा लगभग 100 शब्द है।

चरण 2: संदर्भ और प्रसंग:
ये पंक्तियाँ अज्ञेय की कविता 'यह दीप अकेला' से ली गई हैं, जो पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग 2' में संकलित है। कवि ने दीप को व्यक्ति का और पंक्ति को समाज का प्रतीक बनाया है। यहाँ कवि व्यक्ति की विशेषताएँ बताकर उसे समाज से जोड़ने की बात करता है।

चरण 3: व्याख्या:
कवि कहता है कि यह व्यक्ति ऐसा जन है जो ऐसे गीत गाता है जिन्हें उसके सिवा कोई और नहीं गाएगा। यह गोताखोर (पनडुब्बा) की तरह गहराई में उतरकर सच्चे मोती लाता है, जिन्हें कोई और कुशल व्यक्ति नहीं ला सकता। यह यज्ञ की समिधा है, जिससे ऐसी आग कोई बिरला हठीला ही सुलगा पाता है। यह अद्वितीय है, कवि का अपना है और कवि ने स्वयं को इसमें अर्पित कर दिया है। यह दीप अकेला है, स्नेह से भरा है, गर्व से भरा और मदमाता है, फिर भी कवि कहता है कि इसे भी पंक्ति को सौंप दो, यानी समाज से जोड़ दो।

चरण 4: विशेष:
1. दीप, पनडुब्बा, मोती और समिधा प्रतीक हैं।
2. 'स्नेह' में श्लेष है: दीप के लिए तेल और व्यक्ति के लिए प्रेम।
3. व्यष्टि का समष्टि में विलय कविता का मूल भाव है। भाषा तत्सम-प्रधान खड़ी बोली है।

अंतिम उत्तर:
व्यक्ति कितना भी अनोखा और गुणवान हो, उसकी सार्थकता समाज की पंक्ति में शामिल होने में है।
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