Question:

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए: (i) 'सरोज-स्मृति' कविता में कवि के जीवन संघर्ष के साथ-साथ उनका सशक्त व्यक्तित्व भी उभरकर सामने आया है। कविता के आधार पर सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। (ii) 'तोड़ो' कविता के संदर्भ में 'पत्थर' और 'चट्टान' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए बताइए कि कवि ने किन सामाजिक और व्यक्तिगत बंधनों को तोड़ने का आह्वान किया है। (iii) 'भरत-राम का प्रेम' कविता में निहित जीवन-मूल्यों को स्पष्ट करते हुए लिखिए कि आधुनिक समय में इसका क्या महत्त्व है?

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हर भाग में कविता की एक पंक्ति लेकर मुख्य बात लिखिए: सरोज स्मृति में 'दुख ही जीवन की कथा रही', तोड़ो में 'ये झूठे बंधन टूटें', भरत-राम का प्रेम में भरत की विनम्रता।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न की माँग:
तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखने हैं। यहाँ तीनों के आदर्श उत्तर दिए गए हैं। परीक्षा में केवल दो लिखिए।

चरण 2: (i) 'सरोज स्मृति' में कवि का संघर्ष और सशक्त व्यक्तित्व:
निराला ने यह कविता पुत्री सरोज की मृत्यु के बाद लिखी। सरोज का विवाह बिना आत्मीय स्वजनों और बिना आमंत्रण के हुआ। माँ न होने से कवि ने 'माँ की कुल शिक्षा मैंने दी' और 'पुष्प-सेज तेरी स्वयं रची'। यह उनका संघर्ष है। 'दुख ही जीवन की कथा रही' उनकी पीड़ा है, पर 'हो इसी कर्म पर वज्रपात, यदि धर्म, रहे नत सदा माथ' उनके अडिग, कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व को दिखाता है।

चरण 3: (ii) 'तोड़ो' में पत्थर और चट्टान का प्रतीक:
रघुबीर सहाय की कविता में 'ये पत्थर ये चट्टानें, ये झूठे बंधन' सृजन की राह की रुकावटें हैं। बाहर ये समाज की रूढ़ियाँ और झूठे बंधन हैं, भीतर मन की ऊब और खीज। कवि 'ये ऊसर बंजर तोड़ो' कहकर परती को खेत बनाने और 'अपने मन के मैदानों पर व्यापी' ऊब तथा 'मन की खीज' को तोड़ने का आह्वान करता है, ताकि मिट्टी में रस आए और नई रचना जन्मे।

चरण 4: (iii) 'भरत-राम का प्रेम' के जीवन-मूल्य:
चित्रकूट की सभा में भरत पुलकित शरीर और आँसू भरी आँखों से कहते हैं कि राम अपराधी पर भी क्रोध नहीं करते, बचपन से उन्होंने कभी भरत का मन नहीं तोड़ा और खेल में हारकर भी उन्हें जिताया। भरत सारा दोष अपने अभाग्य पर लेते हैं और माता को दोष देना भी उचित नहीं मानते। इसमें भ्रातृ-प्रेम, विनम्रता, अपनी भूल मानने का साहस और बड़ों के प्रति श्रद्धा जैसे मूल्य हैं। आज स्वार्थ और संपत्ति के झगड़ों में ये मूल्य परिवार को जोड़ने का रास्ता दिखाते हैं।

अंतिम उत्तर:
'सरोज स्मृति' पिता की पीड़ा और दृढ़ता, 'तोड़ो' बाहरी और भीतरी बंधनों को तोड़ने का संदेश तथा 'भरत-राम का प्रेम' त्याग, विनम्रता और भ्रातृ-प्रेम का आदर्श प्रस्तुत करती है।
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