Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ से उद्धृत कथन ‘दासता केवल कानूनी पराधीनता ही नहीं है’ – का आशय स्पष्ट कीजिए।

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कानूनी गुलामी और समाज द्वारा थोपे गए कर्तव्यों की विवशता में अंतर कीजिए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का परिचय:
‘श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा’ तथा ‘मेरी कल्पना का आदर्श समाज’ डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार हैं।
वे स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता पर आधारित समाज चाहते हैं।

चरण 2: कथन का आशय:
लेखक कहते हैं कि दासता केवल कानून द्वारा किसी को गुलाम बनाना ही नहीं है।
जब कुछ लोगों को दूसरों द्वारा तय किए गए व्यवहार और कर्तव्य मानने के लिए विवश किया जाता है, वह भी दासता है।

अंतिम उत्तर:
आशय यह है कि जाति-प्रथा व्यक्ति को अपनी रुचि का पेशा चुनने की स्वतंत्रता नहीं देती और उस पर थोपे गए काम करवाती है। कानूनी रूप से स्वतंत्र होने पर भी ऐसी सामाजिक विवशता दासता ही है।
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