Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर लिखिए कि महामारी की त्रासदी झेल रहे लोगों पर ढोल की आवाज़ का क्या प्रभाव पड़ता था ?

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पाठ के अनुसार ढोलक की आवाज़ मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती थी और मरते लोग मृत्यु से नहीं डरते थे।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ (आरोह भाग 2) में गाँव पहले अनावृष्टि और अन्न की कमी से, फिर मलेरिया और हैज़े से पीड़ित है। रोज़ दो-तीन लाशें उठती हैं। रात होते ही लोग झोंपड़ियों में चुप हो जाते हैं और भयानक सन्नाटा छा जाता है।

चरण 2: ढोलक की भूमिका:
लुट्टन सिंह पहलवान संध्या से सुबह तक ढोलक बजाता रहता था। लेखक के अनुसार रात्रि की विभीषिका को केवल पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती थी।

चरण 3: आदर्श उत्तर:
ढोलक की आवाज़ औषधि-उपचार से वंचित, अधमरे ग्रामीणों में संजीवनी शक्ति भरती थी। उसे सुनकर बूढ़े, बच्चे और जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था और सुन्न नसों में भी बिजली दौड़ जाती थी। ढोलक बुखार या महामारी को नहीं रोक सकती थी, पर मरते हुए लोगों को आँख मूँदते समय कष्ट नहीं होता था और वे मृत्यु से डरते नहीं थे।

अंतिम उत्तर:
ढोलक की आवाज़ महामारी से त्रस्त लोगों में संजीवनी शक्ति भरती थी और उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त करती थी।
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