Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर शीर्षक का औचित्य सिद्ध कीजिए।

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धरती में दबी सिंधु सभ्यता और खंडहरों में पाँव आहिस्ता उठाकर चलते लेखक के अनुभव, दोनों अर्थों से शीर्षक की सार्थकता बताइए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘अतीत में दबे पाँव’ ओम थानवी का यात्रा-वृत्तांत है (वितान, भाग 2)। इसमें लेखक पाकिस्तान में स्थित मुअनजो-दड़ो और हड़प्पा के अवशेष देखकर सिंधु घाटी की सभ्यता का वर्णन करता है।

चरण 2: शीर्षक के दो अर्थ:
पहला अर्थ – सिंधु सभ्यता हज़ारों वर्ष मिट्टी के टीलों के नीचे दबी रही, यानी अतीत धरती में दबा पड़ा था, जिसे खुदाई ने सामने लाया। दूसरा अर्थ – लेखक उस अतीत में ‘दबे पाँव’, यानी धीरे और चुपचाप प्रवेश करता है।

चरण 3: पाठ से प्रमाण:
लेखक लिखता है कि खंडहरों में हर कोई पाँव आहिस्ता उठाते हुए एक घर से दूसरे घर में बेहद धीमी गति से दाखिल होता था, मानो किसी अजनबी घर में अनधिकार चहलकदमी का अपराध-बोध हो। वह यह भी कहता है कि किसी घर की देहरी पर पाँव रखकर आप सहसा सहम सकते हैं और रसोई की खिड़की पर खड़े होकर उसकी गंध महसूस कर सकते हैं।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
‘अतीत में दबे पाँव’ शीर्षक पूरी तरह उचित है। पाठ का विषय पाँच हज़ार साल पुरानी सिंधु सभ्यता है, जो धरती के नीचे दबी थी। लेखक जब मुअनजो-दड़ो की गलियों और घरों में घूमता है तो पाँव आहिस्ता उठाकर, बहुत धीमे चलता है, मानो किसी पराए घर में बिना अनुमति घुस आया हो। देहरी पर पाँव रखते ही वह सहम जाता है और उस बीते जीवन को महसूस करता है। इस प्रकार शीर्षक विषय, लेखक के अनुभव और खंडहरों के मौन, तीनों को प्रकट करता है।

अंतिम उत्तर:
धरती में दबी सभ्यता और उसमें दबे पाँव, धीरे-धीरे घूमते लेखक के अनुभव के कारण शीर्षक सार्थक और उचित है।
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