Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

“मुअनजो-दडो की सभ्यता ‘लघुता में भी महत्ता का अनुभव कराने वाली’ सभ्यता थी।” – ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने ऐसा क्यों कहा है ?

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सड़कों, नालियों, कुओं, स्नानघर और छोटी वस्तुओं के उदाहरण देकर बताइए कि भव्यता न होने पर भी सुव्यवस्था और कला थी।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
‘अतीत में दबे पाँव’ ओम थानवी का यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगर मुअनजो-दड़ो की यात्रा और वहाँ के अवशेषों का वर्णन किया है।

चरण 2: कथन का आशय:
‘लघुता में भी महत्ता’ का अर्थ है कि वस्तुएँ और भवन भले साधारण या छोटे हों, पर उनमें नियोजन, कला और सुरुचि बहुत ऊँचे दर्जे की है।
यहाँ राजाओं के विशाल महल या स्मारक नहीं मिलते। फिर भी नगर की बनावट बड़ी सुव्यवस्थित है।

चरण 3: उदाहरण:
सड़कें सीधी और चौड़ी हैं, घर पंक्ति में बने हैं और ढकी हुई नालियाँ बनी हैं। हर घर के साथ कुआँ या स्नान की व्यवस्था है।
संग्रहालय में छोटी नावें, औज़ार, मनके, सुइयाँ, खिलौने और चक्कियाँ मिलती हैं। इनका आकार छोटा है, पर कारीगरी सुंदर है।
लेखक के अनुसार इस सभ्यता का सौंदर्य-बोध समाज-पोषित था, राज या धर्म द्वारा पोषित नहीं।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
लेखक ने मुअनजो-दड़ो को लघुता में महत्ता वाली सभ्यता इसलिए कहा क्योंकि वहाँ भव्य महल या स्मारक नहीं, किंतु जीवन की सुव्यवस्था अद्भुत है। सीधी सड़कें, ढकी नालियाँ, कुएँ, स्नानघर और पंक्तिबद्ध घर उन्नत नगर-नियोजन दिखाते हैं। छोटी नावें, औज़ार, मनके, सुइयाँ और खिलौने साधारण होकर भी कला-प्रेम प्रकट करते हैं। इसलिए यह सभ्यता सादगी में भी महान थी।

अंतिम उत्तर:
साधारण और छोटी चीज़ों में भी सुव्यवस्था, कला और सौंदर्य-बोध के कारण लेखक ने इसे लघुता में महत्ता वाली सभ्यता कहा।
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