List of top Questions asked in UP Board XII

संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : गुरुणा एवम् आज्ञप्तः महर्षिदयानन्दः एतद्देशवासिनो जनान् उद्धर्तुं कर्मक्षेत्रेऽवतारत् । सर्वप्रथमं हरिद्वारे कुम्भपर्वणि भागीरथीतटे पाखण्डखण्डिनीं पताकामस्थापयत् । ततश्च हिमाद्रिं गत्वा त्री वर्षाणि तपः अतप्यत । तदनन्तरमयं प्रतिपादितवान् ऋग्यजुस्सामाथर्वाणो वेदा नित्या ईश्वरकर्तृकाश्च ब्राह्मण-क्षत्रिय वैश्य शूद्राणां गुणकर्मस्वभावैः विभाग: न तु जन्मना, चत्वार एव आश्रमाः, ईश्वरः एक एव ब्रह्म-पितृ देवातिथि - बलि - वैश्वदेवाः पञ्च महायज्ञा: नित्यं करणीयाः । 'स्त्रीशूद्रौ वेदं नाधीयाताम् अस्य वाक्यस्य असारतां प्रतिपाद्य सर्वेषां वेदाध्ययनाधिकारं व्यवस्थापयत् । 
 

हमारी सम्पूर्ण व्यवस्था का केन्द्र मानव होना चाहिए जो 'यत् पिण्डे तद् ब्रह्मांडे' के न्याय के अनुसार समष्टि का जीवमान प्रतिनिधि एवं उसका उपकरण है । भौतिक उपकरण मानव के सुख के साधन हैं, साध्य नहीं । जिस व्यवस्था में भिन्नरुचिलोक का विचार केवल एक औसत मानव से अथवा शरीर-मन-बुद्धि- आत्मायुक्त अनेक एषणाओं से प्रेरित पुरुषार्थचतुष्टयशील, पूर्ण मानव के स्थान पर एकांगी मानव का ही विचार किया जाए, वह अधूरी है। हमारा आधार एकात्म मानव है जो अनेक एकात्म समष्टियों का एक साथ प्रतिनिधित्व करने की क्षमता रखता है । एकात्म मानववाद (Integral Humanism) के आधार पर हमें जीवन की सभी व्यवस्थाओं का विकास करना होगा ।