निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए
वसुदेवशरण अग्रवाल:
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश: पृथ्वी के विलय रंगमंच में सभी जातियों के लिए समान क्षेत्र है। मनुष्य के मार्ग से प्रभावित पृथ्वी उसकी करके एक जीव का अधिकार है। निकट जन पीछे, छोड़कर राज्य आगे नहीं बढ़ सकता। उत्तप्त राज्य के पुरखें अंग की सुघ्र हमे लेनी होगी। राज्य के एक अंग में यदि अंधकार और बिवलता का निवास है, तो सम्पूर्ण राष्ट्र का स्वास्थ्य उठने अंग में असमर्थ रहा।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:कहते हैं दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है। केवल उतना ही याद रखती है, जितने से उसका स्वार्थ साधता है। बाकियों को फेंककर आगे बढ़ जाती है। शायद अशोक से उसका स्वार्थ नहीं सधता। क्यों उसे वह याद रखती? सारा संसार स्वार्थ का अखाड़ा ही तो है।
जलवायु के फटे कितने उत्थान
दीन, कच्छुए इन्होंने - उत्तराय;
किन्तु वह बढ़ी रहे द्रुत मूर्ति
अन्युद्दय कर रही उपाय।
शक्ति के विभिन्न, जो व्यस्त
विकल बिसरे हैं, हो निष्क्षय;
सम्पन्न अवस्थ को समस्त
विज्ञानिनी मानवता हो जाय।
तुम मांसहीन, तुम रक्तहीन,
हे अस्थशेष, हे अस्तहीन,
तुम शुद्धबुद्ध आत्माकेवल,
हे चिरपुराण! हे चिर नवीन।
तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
जिसमें असार भव-शून्यलीन,
आधार अमर, होगी जिस पर
भावी की संस्कृति समसीन।
दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
निंदा का उद्गम ही हीनता और कमजोरी से होता है।मनुष्य अपनी हीनता से डरता है। वह दूसरों की निंदा करके ऐसा अनुभव करता है कि वे सब निकृष्ट हैं और वह उनसे अच्छा है।