दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:कहते हैं दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है। केवल उतना ही याद रखती है, जितने से उसका स्वार्थ साधता है। बाकियों को फेंककर आगे बढ़ जाती है। शायद अशोक से उसका स्वार्थ नहीं सधता। क्यों उसे वह याद रखती? सारा संसार स्वार्थ का अखाड़ा ही तो है।
यह गद्यांश ‘अशोक के फूल’ पाठ से लिया गया है और इसके लेखक यशंकर प्रसाद हैं।
“केवल उतना ही याद रखती है, जितने से उसका स्वार्थ साधता है। बाकियों को फेंककर आगे बढ़ जाती है।” इसका अर्थ है कि संसार केवल उन्हीं बातों और व्यक्तियों को याद रखता है, जिनसे उसे लाभ या स्वार्थ सिद्ध होता है। बाकी सबको भुला देता है।
लेखक के अनुसार, संसार ने अशोक को इसलिये भुला दिया क्योंकि उससे उसका स्वार्थ पूरा नहीं हुआ।
लेखक ने दुनिया को स्वार्थी बताया है, जो केवल अपने लाभ के लिए लोगों और घटनाओं को याद रखती है।
लेखक ने पूरे संसार को स्वार्थ का अखाड़ा कहा है।