दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश: पृथ्वी के विलय रंगमंच में सभी जातियों के लिए समान क्षेत्र है। मनुष्य के मार्ग से प्रभावित पृथ्वी उसकी करके एक जीव का अधिकार है। निकट जन पीछे, छोड़कर राज्य आगे नहीं बढ़ सकता। उत्तप्त राज्य के पुरखें अंग की सुघ्र हमे लेनी होगी। राज्य के एक अंग में यदि अंधकार और बिवलता का निवास है, तो सम्पूर्ण राष्ट्र का स्वास्थ्य उठने अंग में असमर्थ रहा।
पाठकाशीषक एवं लेखक: इस गद्यांश का शीर्षक है ‘समन्वय’ और लेखक हैं रामधारी सिंह ‘दिनकर’।
राष्ट्र के प्रत्येक अंग की सुध क्यों लेनी चाहिए? क्योंकि राष्ट्र तभी स्वस्थ और समर्थ हो सकता है जब उसके सभी अंग समान रूप से विकसित हों। यदि किसी भाग में अंधकार या दुर्बलता रहेगी, तो पूरा राष्ट्र प्रभावित होगा।
रेखांकित अंश की व्याख्या: “समन्वय के मार्ग से भरपूर प्रगति और उन्नति करने का सबको एक जैसा अधिकार है।” इसका अर्थ है कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलने चाहिए। किसी जाति, वर्ग या व्यक्ति के साथ भेदभाव किए बिना सबको उन्नति का अधिकार है।
राष्ट्र किनके पीछे छोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता? राष्ट्र अपने किसी भी अंग या वर्ग को पीछे छोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
समन्वय के मार्ग से क्या प्राप्त हो सकता है? समन्वय के मार्ग से राष्ट्र को प्रगति, विकास और समान अधिकार की प्राप्ति होती है।