जलवायु के फटे कितने उत्थान
दीन, कच्छुए इन्होंने - उत्तराय;
किन्तु वह बढ़ी रहे द्रुत मूर्ति
अन्युद्दय कर रही उपाय।
शक्ति के विभिन्न, जो व्यस्त
विकल बिसरे हैं, हो निष्क्षय;
सम्पन्न अवस्थ को समस्त
विज्ञानिनी मानवता हो जाय।
यह अंश यह संकेत करता है कि मानवता को कभी भी कमजोर या कमजोर नहीं माना जा सकता है। समाज और जीवन में हर हालात में यह उभर कर सामने आती है और किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति को सामना करने के लिए तैयार रहती है।
'उत्तरण' का अर्थ है - "उठना" या "मुक्ति प्राप्त करना", विशेष रूप से किसी कठिनाई या संकट से बाहर निकलना।
'अन्युद्दय' का अर्थ है - "प्रेरणा" या "विकसित करना", खासकर जो धीरे-धीरे प्रगति करने वाला है।