रस के कितने अंग होते हैं ?
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'करुण रस' का स्थायी भाव है:
'चरण-कमल बंदौं हरि राइ।' उपर्युक्त पंक्ति में अलंकार है:
'हास्य रस' का स्थायी भाव है:
'मनहुँ, मानो, जनु, जानो' आदि वाचक शब्द किस अलंकार में प्रायः प्रयुक्त होते हैं?
'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?