'हास्य रस' का स्थायी भाव है:
Step 1: रस और स्थायी भाव का संबंध.
काव्यशास्त्र के अनुसार प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव होता है। स्थायी भाव ही उस रस की उत्पत्ति का मूल कारण है।
Step 2: हास्य रस का विश्लेषण.
हास्य रस विनोद, हँसी और हास-परिहास की भावनाओं से उत्पन्न होता है। इसका स्थायी भाव हास है।
Step 3: विकल्पों का विश्लेषण.
(A) शोक: यह करुण रस का स्थायी भाव है।
(B) हास: सही — हास्य रस का स्थायी भाव हास है।
(C) रति: यह श्रृंगार रस का स्थायी भाव है।
(D) उत्साह: यह वीर रस का स्थायी भाव है।
Step 4: निष्कर्ष.
सही उत्तर है (B) हास।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'करुण रस' का स्थायी भाव है:
'चरण-कमल बंदौं हरि राइ।' उपर्युक्त पंक्ति में अलंकार है:
'मनहुँ, मानो, जनु, जानो' आदि वाचक शब्द किस अलंकार में प्रायः प्रयुक्त होते हैं?
रस के कितने अंग होते हैं ?
'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?