'मनहुँ, मानो, जनु, जानो' आदि वाचक शब्द किस अलंकार में प्रायः प्रयुक्त होते हैं?
Step 1: अलंकार परिचय.
अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। उत्प्रेक्षा अलंकार में किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के समान कल्पना करके प्रस्तुत किया जाता है।
Step 2: विशेष संकेत शब्द.
'मनहुँ, मानो, जनु, जानो' आदि शब्द उत्प्रेक्षा अलंकार के सूचक हैं। इन शब्दों से यह भाव आता है कि वस्तु दूसरी वस्तु जैसी प्रतीत होती है।
Step 3: विकल्पों का विश्लेषण.
(A) उत्प्रेक्षा: सही — क्योंकि दिए गए शब्द उत्प्रेक्षा में प्रयुक्त होते हैं।
(B) रूपक: इसमें वस्तु को प्रत्यक्ष रूप में दूसरी वस्तु कहा जाता है।
(C) उपमा: इसमें 'जैसे, सरिस, समान' आदि शब्द आते हैं।
(D) यमक: इसमें एक ही शब्द का बार-बार भिन्न अर्थ में प्रयोग होता है।
Step 4: निष्कर्ष.
सही उत्तर है (A) उत्प्रेक्षा।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'करुण रस' का स्थायी भाव है:
'चरण-कमल बंदौं हरि राइ।' उपर्युक्त पंक्ति में अलंकार है:
'हास्य रस' का स्थायी भाव है:
रस के कितने अंग होते हैं ?
'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?