'करुण रस' का स्थायी भाव है:
Step 1: रस और स्थायी भाव का संबंध.
हिंदी काव्यशास्त्र के अनुसार प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव होता है। स्थायी भाव ही उस रस की उत्पत्ति का मूल है।
Step 2: करुण रस का विश्लेषण.
करुण रस दुःख, करुणा और संवेदना की भावनाओं को उत्पन्न करता है। इसका स्थायी भाव शोक है।
Step 3: विकल्पों का विश्लेषण.
(A) रौद्र: यह क्रोध रस का स्थायी भाव है।
(B) उत्साह: यह वीर रस का स्थायी भाव है।
(C) अद्भुत: यह अद्भुत रस का ही स्थायी भाव है।
(D) शोक: सही — करुण रस का स्थायी भाव शोक है।
Step 4: निष्कर्ष.
सही उत्तर है (D) शोक।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'चरण-कमल बंदौं हरि राइ।' उपर्युक्त पंक्ति में अलंकार है:
'हास्य रस' का स्थायी भाव है:
'मनहुँ, मानो, जनु, जानो' आदि वाचक शब्द किस अलंकार में प्रायः प्रयुक्त होते हैं?
रस के कितने अंग होते हैं ?
'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?