Question:

निम्नलिखित संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : "निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्। अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा न्याय्यात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः॥"

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

सन्दर्भ:
यह प्रसिद्ध श्लोक भर्तृहरि-रचित 'नीतिशतक' से लिया गया है, जिसमें धीर/स्थितप्रज्ञ पुरुष के अडिग नैतिक चरित्र का वर्णन है।

हिन्दी अनुवाद:
नीति में निपुण लोग चाहे निन्दा करें या स्तुति करें, लक्ष्मी चाहे आये या इच्छानुसार चली जाये, मृत्यु चाहे आज ही हो या युगान्तर में हो — धीर (स्थिरबुद्धि) पुरुष न्यायपूर्ण मार्ग से एक कदम भी विचलित नहीं होते।

भावार्थ:
यह श्लोक यह सन्देश देता है कि सच्चे धैर्यवान् मनुष्य बाह्य निन्दा-स्तुति, धन-हानि-लाभ अथवा मृत्यु के भय से कभी अपने सत्य और न्याय के मार्ग को नहीं छोड़ते — यही आदर्श चरित्र की पहचान है।
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