सन्दर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत भाषा एवं साहित्य के गौरव तथा उसकी सांस्कृतिक महत्ता पर केन्द्रित पाठ से उद्धृत है, जिसमें संस्कृत को भारतीय सभ्यता की एकता व अखण्डता का आधार बताया गया है।
हिन्दी अनुवाद:
संस्कृत साहित्य के आदिकवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास, कविकुलगुरु कालिदास तथा अन्य भास, भारवि, भवभूति आदि महाकवि अपने ग्रन्थरत्नों के द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान हैं। यह भाषा (संस्कृत) हमारे द्वारा माता के समान सम्माननीय एवं वन्दनीय है, क्योंकि भारतमाता की स्वतन्त्रता, गौरव, अखण्डता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत भाषा के द्वारा ही सुरक्षित रखी जा सकती है। यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ है। इसीलिए भली-भाँति कहा गया है — 'भाषाओं में प्रमुख, मधुर तथा दिव्य देववाणी (संस्कृत) है'।