Question:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
संस्कृतस्य साहित्यं सरसं, व्याकरणश्च सुनिश्चितम् । तस्य गद्ये पद्ये च लालित्यं, भावबोधसामर्थ्यम्, अद्वितीयं श्रुतिमाधुर्यश्च वर्तते । किं बहुना चरित्रनिर्माणार्थं यादृशीं सत्प्रेरणां संस्कृतवाङ्मयं ददाति न तादृशीं किश्चिदन्यत् । मूलभूतानां मानवीयगुणानां यादृशी विवेचना संस्कृतसाहित्ये वर्तते, नान्यत्र तादृशी । दया, दान, शौचम्, औदार्यम्, अनसूया, क्षमा अन्ये चानेके गुणाः अस्य साहित्यस्य अनुशीलनेन सञ्जायते ।

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

सन्दर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत साहित्य के गुण-वैशिष्ट्य एवं चरित्र-निर्माण में उसकी भूमिका का प्रतिपादन करता है।

हिन्दी अनुवाद:
संस्कृत का साहित्य रसपूर्ण है, और उसका व्याकरण सुनिश्चित (सुव्यवस्थित) है। उसके गद्य और पद्य दोनों में सुन्दरता, भावों को समझने की सामर्थ्य तथा अद्वितीय श्रवण-माधुर्य विद्यमान है। अधिक क्या कहें — चरित्र-निर्माण के लिए संस्कृत साहित्य जैसी सत्प्रेरणा अन्य कोई साहित्य नहीं देता। मूलभूत मानवीय गुणों का जैसा गहन विवेचन संस्कृत साहित्य में मिलता है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। दया, दान, पवित्रता, उदारता, ईर्ष्यारहितता, क्षमा तथा अन्य अनेक सद्गुण इस साहित्य के अध्ययन से उत्पन्न होते हैं।
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