Question:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए
अतीते प्रथमकल्पे चतुष्पदाः सिंहं राजानमकुर्वत् । मत्स्या आनन्दमत्स्यं, शकुनयः सुवर्णहंसम् । तस्य पुनः सुवर्णराजहंसस्य दुहिता हंसपोतिका अतीव रूपवती आसीत् । स तस्यै वरमदात् यत् सा आत्मनश्चिररुचितं स्वामिनं वृणुयात् इति । हंसराजः तस्यै वरं दत्वा हिमवति शकुनिसङ्घे संन्यपतत् । नानाप्रकाराः हंसमयूरादयः शकुनिगणाः समागत्य एकस्मिन् महति पाषाणतले संन्यपतन् ।

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

सन्दर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश एक पशु-पक्षी कथा से लिया गया है, जिसमें विभिन्न प्राणी-वर्गों द्वारा अपने-अपने राजा चुने जाने की कथा वर्णित है।

हिन्दी अनुवाद:
अतीत काल (प्रथम युग) में चौपायों ने सिंह को अपना राजा बनाया। मछलियों ने आनन्द-मत्स्य को, और पक्षियों ने स्वर्ण-हंस को (अपना राजा बनाया)। उस स्वर्ण-राजहंस की पुत्री हंसपोतिका अत्यंत रूपवती थी। उसने (राजहंस ने) उसे यह वरदान दिया कि वह स्वयं अपनी दीर्घकालिक अभिलाषा के अनुसार अपना स्वामी (वर) स्वयं चुन ले। हंसराज ने उसे यह वरदान देकर हिमालय पर पक्षी-समूह के मध्य विश्राम किया। नाना प्रकार के हंस, मयूर आदि पक्षिगण एकत्रित होकर एक विशाल पाषाण-तल (चट्टान) पर बैठ गए।
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