'पुरोहित' का संधि-विच्छेद है—
Step 1: मूल पदों की पहचान.
'पुरः' (= साम्हने/आगे) + 'हित' (= कल्याण)
Step 2: संधि-नियम.
'ः + ह' के संयोग से 'र' ध्वनि का आगमन होता है, अतः 'पुरः + हित' \(\rightarrow\) पुरोहित।
Step 3: विकल्प-जांच.
(1) पुरः + हित — नियमानुसार सही। अन्य विकल्प मूल-रूप/अर्थ से मेल नहीं खाते।
'कंकाल' किस विधा की रचना है?
'वैशाली में वसन्त' किसका नाटक है?
जयशंकर प्रसाद किस युग के लेखक हैं?
ऐतिहासिक उपन्यासकार है—
शुक्लोत्तर-युग की समयावधि है—
'बादल' का पर्याय है—
'कृतज्ञ' (स्कैन में 'कृतञ्ज/कूटज' सा अस्पष्ट) का विलोम है—
"चौराहा" का तत्सम है—
'कर्ण' का तद्भव है—
जो ईश्वर में विश्वास न रखता हो, उसे कहते हैं—