'पठेयं' में वचन और पुरुष है—
Step 1: रूप-पहचान.
'पठेयं' संस्कृत विधिलिङ् (सम्भावना/इच्छा) का उत्तम पुरुष, एकवचन रूप है—अर्थ: "मैं पढ़ूँ/पढ़ूँगा (कदाचित्)"।
Step 2: विकल्प-जांच.
रूपांत \(-ेयं\) का अंत सामान्यतः उत्तम-एकवचन को सूचित करता है; अतः (1) सही।
'कंकाल' किस विधा की रचना है?
'वैशाली में वसन्त' किसका नाटक है?
जयशंकर प्रसाद किस युग के लेखक हैं?
ऐतिहासिक उपन्यासकार है—
शुक्लोत्तर-युग की समयावधि है—
'बादल' का पर्याय है—
'कृतज्ञ' (स्कैन में 'कृतञ्ज/कूटज' सा अस्पष्ट) का विलोम है—
"चौराहा" का तत्सम है—
'कर्ण' का तद्भव है—
जो ईश्वर में विश्वास न रखता हो, उसे कहते हैं—