Question:

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 
भारतेन्दु-मंडल की किसी सजीव स्मृति के प्रति मेरी कितनी उत्कंठा रही होगी, यह अनुमान करने की बात है। मैं नगर से बाहर रहता था। एक दिन बालकों की मंडली जोड़ी गई। जो चौधरी साहब के मकान से परिचित थे, वे अगुवा हुए। मील डेढ़ मील का सफर तय हुआ। पत्थर के एक बड़े मकान के सामने हम लोग जा खड़े हुए। नीचे का बरामदा खाली था। ऊपर का बरामदा सघन लताओं के जाल से आवृत्त था। बीच-बीच में खंबे और खुली जगह दिखाई पड़ती थी। उसी ओर देखने के लिए मुझसे कहा गया। कोई दिखाई न पड़ा। सड़क पर कई चक्कर लगे। कुछ देर पीछे एक लड़के ने ऊँगली से ऊपर की ओर इशारा किया। लता-प्रतान के बीच एक मूर्ति खड़ी दिखाई पड़ी। ....... बस, यही पहली झाँकी थी।

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ऐतिहासिक या साहित्यिक व्यक्तित्व से जुड़ी सप्रसंग व्याख्या में भावनात्मक जुड़ाव के साथ वर्णनात्मक शक्ति को भी उजागर करना आवश्यक होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

संदर्भ: 
यह गद्यांश लेखक द्वारा भारतेन्दु-मंडल से जुड़ी अपनी स्मृति की झलक को दर्शाता है। लेखक अपने बचपन की उस उत्कंठा को साझा करता है जो भारतेन्दु हरिश्चंद्र के व्यक्तित्व को प्रत्यक्ष देखने की लालसा से उत्पन्न हुई थी। 
प्रसंग: 
यह प्रसंग लेखक के बाल्यकाल की एक महत्वपूर्ण स्मृति से जुड़ा है जब वह अपने साथियों के साथ भारतेन्दु जी के घर उन्हें देखने गया था। उस क्षण में उसे एक जीवंत किंतु रहस्यमय झलक मिली थी, जो जीवन भर उसकी स्मृति में संचित रही। 
व्याख्या: 
लेखक भावुकता से भरकर उस दिन को याद करता है जब वह भारतेन्दु जी को देखने की उत्सुकता से चल पड़ा। वह अनुभवशील बालक था, जिसकी साहित्यिक चेतना विकसित हो रही थी। जिस ‘मूर्ति’ का वर्णन किया गया है, वह कोई सामान्य आकृति नहीं थी, बल्कि भारतेन्दु जैसे महान साहित्यकार की पहली सजीव छवि थी। 
बरामदे में खड़ी वह आकृति, जो लताओं के बीच से दिख रही थी, लेखक के लिए रहस्य, प्रेरणा और रोमांच का केंद्र बन जाती है। यह दृश्य बाल मन पर अत्यंत गहरी छाप छोड़ता है। यह एक झलक भारतेन्दु युग की उस धरोहर से जोड़ती है जिसे लेखक ने स्वप्नवत् देखा था। 
निष्कर्ष: 
यह गद्यांश लेखक की साहित्यिक संवेदनशीलता, स्मृति की शक्ति और बाल्यकाल की जिज्ञासा को दर्शाता है। भारतेन्दु के व्यक्तित्व की पहली झलक उसके लिए किसी दिव्य दर्शन से कम नहीं थी। यह अनुभूति आज भी लेखक के अंतर्मन में जीवंत बनी हुई है।

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