Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘शिरीष के फूल’ पाठ से ली गई पंक्ति ‘ऐसे दुमदारों से तो लँडूरे भले’ का आशय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि लेखक ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है ?

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पलाश और अमलतास कितने दिन फूलते हैं और शिरीष कितने दिन, इस अंतर पर ध्यान दीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ और लेखक का परिचय:
'शिरीष के फूल' आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है, जो 'आरोह' भाग 2 में संकलित है।
इसमें लेखक शिरीष को एक अवधूत की तरह देखता है, जो भीषण गर्मी में भी खिला रहता है।

चरण 2: पंक्ति का संदर्भ:
लेखक कहता है कि शिरीष वसंत से भादों तक लगातार फूलता रहता है।
इसके विपरीत पलाश और अमलतास जैसे वृक्ष केवल दस-पंद्रह दिन के लिए फूलते हैं और फिर ठूँठ (खंखड़) हो जाते हैं।
कबीर को भी ऐसा थोड़े दिन का फूलना पसंद नहीं था, इसी प्रसंग में लेखक कहता है - ऐसे दुमदारों से तो लँडूरे भले।

चरण 3: आशय:
दुमदार का अर्थ है पूँछ वाला, यानी कुछ दिन की शोभा वाला और लँडूरा का अर्थ है बिना पूँछ वाला।
जो थोड़े दिन चमक-दमक दिखाकर फिर सूना हो जाए, उससे तो वह अच्छा है जिसके पास दिखावा ही न हो।
लेखक क्षणिक वैभव की तुलना में स्थायी और लगातार बनी रहने वाली शोभा को श्रेष्ठ मानता है।

अंतिम उत्तर:
लेखक ने यह बात पलाश-अमलतास के थोड़े दिन फूलने के संदर्भ में कही है; आशय है कि क्षणिक शोभा वाले से शोभाहीन ही भला, सच्चा सौंदर्य शिरीष की तरह टिकाऊ होता है।
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