Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘शिरीष के फूल’ पाठ में बताया गया है कि कबीरदास को पंद्रह-बीस दिन का लहक उठना पसंद नहीं था। ‘लहक उठना’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि क्या आप भी इसमें विश्वास रखते हैं ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

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पंद्रह-बीस दिन फूलने वाले अमलतास और पलाश की तुलना लंबे समय तक फूलने वाले शिरीष से कीजिए। फिर अपने तर्क दीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का प्रसंग:
'शिरीष के फूल' आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है।
लेखक बताते हैं कि आरग्वध (अमलतास) केवल पंद्रह-बीस दिन के लिए फूलता है, वसंत ऋतु के पलाश की भाँति।
इसके विपरीत शिरीष वसंत के आगमन के साथ लहक उठता है, आषाढ़ तक मस्त बना रहता है और मन रम जाए तो भरे भादों में भी फूलता रहता है।

चरण 2: 'लहक उठना' का अर्थ:
'लहक उठना' का अर्थ है उमंग, शोभा और उल्लास से अचानक खिल उठना।
पाठ के संदर्भ में यह थोड़े दिनों का खिलना है, जिसके बाद पौधा फिर सूखा-सा हो जाता है।
लेखक कहते हैं कि कबीरदास को इस तरह पंद्रह दिन के लिए लहक उठना पसंद नहीं था, और कबीर की पंक्ति देते हैं, 'दिन दस फूला फूलिकै खंखड़ भया पलास'।

चरण 3: मेरा मत (तर्क सहित):
मैं भी इस विचार में विश्वास रखता हूँ।
कुछ दिनों का जोश और फिर निराशा जीवन को सफल नहीं बनाती।
शिरीष की तरह कठिन परिस्थितियों में भी लगातार सक्रिय, धैर्यवान और प्रसन्न रहना ही सच्ची सफलता है।
पढ़ाई, खेल या किसी भी काम में निरंतर लगन से ही लक्ष्य मिलता है।

अंतिम उत्तर:
'लहक उठना' का अर्थ है थोड़े समय के लिए उमंग से खिल उठना; मैं भी मानता हूँ कि क्षणिक जोश के स्थान पर निरंतर उत्साह और धैर्य से जीना श्रेष्ठ है।
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