Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘शिरीष के फूल’ पाठ में लेखक द्वारा शिरीष, अवधूत और गाँधी जी को समानांतर किस आधार पर रखा गया है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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शिरीष के लू और धूप में भी खिले रहने के गुण को अवधूत की अनासक्ति और गाँधी जी की स्थिरता से जोड़िए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का संदर्भ:
'शिरीष के फूल' आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है।
इसमें लेखक शिरीष को कालजयी अवधूत कहते हैं।
निबंध के अंत में वे शिरीष की तुलना गाँधी जी से करते हैं।

चरण 2: शिरीष की विशेषता:
जेठ की जलती धूप और लू में भी शिरीष हरा-भरा और फूलों से लदा रहता है।
वह वायुमंडल से रस खींचकर एक साथ कोमल भी है और कठोर भी।
विपरीत परिस्थितियों का उस पर कोई असर नहीं होता।

चरण 3: अवधूत से समानता:
अवधूत वह संन्यासी है जो सुख-दुख, लाभ-हानि से ऊपर उठकर अनासक्त भाव से जीता है।
शिरीष भी अनासक्त होकर कठिन मौसम में मस्ती से खिलता है, इसलिए लेखक उसे अवधूत कहते हैं।

चरण 4: गाँधी जी से समानता:
गाँधी जी भी मार-काट, अग्निदाह और हिंसा के बीच स्थिर और शांत बने रहे।
वे भी कोमल हृदय वाले होकर भी अपने सिद्धांतों पर कठोरता से टिके रहे।
इसीलिए लेखक को शिरीष देखकर गाँधी जी की याद आती है।

अंतिम उत्तर:
अनासक्ति, विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने, कोमलता और कठोरता के मेल तथा अजेय जीवनी-शक्ति के आधार पर लेखक ने शिरीष, अवधूत और गाँधी जी को समानांतर रखा है।
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