Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘दुःख हो या सुख, वह हार नहीं मानता। न ऊधो का लेना, न माधो का देना।’ ‘शिरीष के फूल’ पाठ में आई यह पंक्ति किसके लिए कही गई, उसकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

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सोचिए कि भीषण गर्मी में भी कौन-सा वृक्ष फूलों से लदा और मस्त रहता है।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘शिरीष के फूल’ आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है।
यह पंक्ति शिरीष के वृक्ष के लिए कही गई है।

चरण 2: पंक्ति का अर्थ:
शिरीष हर परिस्थिति में एक-सा रहता है, चाहे सुख हो या दुख।
‘न ऊधो का लेना, न माधो का देना’ का अर्थ है कि वह किसी से कोई लेन-देन या मोह नहीं रखता, अपनी मस्ती में रहता है।

चरण 3: शिरीष की विशेषताएँ:
1. वह भीषण गर्मी और लू में भी फूलों से लदा रहता है।
2. वसंत से लेकर भादों तक लंबे समय तक फूलता है।
3. वह अवधूत की तरह अनासक्त और फक्कड़ है, जो जलती धरती में भी रस खींचकर हरा-भरा रहता है।
4. उसके फूल अत्यंत कोमल हैं, पर फल बहुत मज़बूत होते हैं।

अंतिम उत्तर:
यह पंक्ति शिरीष के लिए कही गई है, जो अनासक्त, अवधूत, कालजयी और विषम परिस्थितियों में भी मस्त रहने वाला वृक्ष है।
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