Question:

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘बादल राग’ कविता से उद्धृत निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए :

‘तिरती है समीर-सागर पर

अस्थिर सुख पर दुख की छाया’

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बादल को क्रांति का प्रतीक मानकर सोचिए। ‘अस्थिर सुख’ किसके हैं और ‘दुख की छाया’ क्या है, यह स्पष्ट कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
ये पंक्तियाँ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता ‘बादल राग’ से ली गई हैं, जो ‘आरोह’ भाग 2 में संकलित है।
इस कविता में बादल को क्रांति और विप्लव का प्रतीक माना गया है।

चरण 2: शाब्दिक अर्थ:
‘समीर-सागर’ का अर्थ है हवा रूपी सागर, और ‘तिरती है’ का अर्थ है तैरती है।
कवि कहता है कि हवा रूपी सागर पर बादल तैर रहे हैं, जो संसार के अस्थिर सुखों पर दुख की छाया के समान हैं।

चरण 3: आशय:
संसार के सुख स्थायी नहीं हैं, वे क्षणिक और अस्थिर हैं।
शोषक और पूँजीपति वर्ग के ये अस्थिर सुख क्रांति रूपी बादलों की छाया से डरे हुए हैं।
बादल क्रांति के रूप में आते हैं, जो शोषकों के लिए दुख और शोषितों के लिए आशा का संदेश लाते हैं।

अंतिम उत्तर:
हवा रूपी सागर पर तैरते बादल संसार के क्षणिक सुखों पर दुख की छाया जैसे हैं; अर्थात क्रांति रूपी बादल शोषक वर्ग के अस्थिर सुखों पर संकट बनकर छा जाते हैं।
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