Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘चूड़ाकर्म’ से क्या अभिप्राय है ? अपने चूड़ाकर्म की उपयुक्तता सिद्ध करने के लिए भक्तिन ने शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका को दिया ?

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चूड़ाकर्म यानी मुंडन। लेखिका के रोकने पर भक्तिन ने ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’ को शास्त्र का वचन बताया।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझना:
यह प्रश्न महादेवी वर्मा के संस्मरणात्मक रेखाचित्र ‘भक्तिन’ (आरोह भाग 2) से है। इसमें दो बातें पूछी गई हैं – ‘चूड़ाकर्म’ का अर्थ और भक्तिन ने शास्त्र का प्रश्न अपनी सुविधा से कैसे सुलझाया। उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखना है।

चरण 2: पाठ का प्रसंग:
लेखिका को स्त्रियों का सिर घुटाना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने भक्तिन को रोका। भक्तिन ने बिना झिझक कहा कि शास्त्र में लिखा है। लेखिका के पूछने पर उसने तुरंत उत्तर दिया – ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध।’ यह किस शास्त्र का सूत्र है, लेखिका नहीं जान सकीं और चुप हो गईं।

चरण 3: आदर्श उत्तर:
‘चूड़ाकर्म’ का अभिप्राय है सिर के बाल मुँडवाना अर्थात मुंडन। लेखिका ने भक्तिन को सिर घुटाने से रोका, तो उसने कहा कि शास्त्र में लिखा है – ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध।’ लेखिका यह न जान सकीं कि यह किस शास्त्र का सूत्र है, इसलिए हारकर मौन हो गईं। इसके बाद भक्तिन का चूड़ाकर्म हर बृहस्पतिवार को एक दरिद्र नाई के गंगाजल से धुले उस्तरे से होता रहा। इस प्रकार उसने शास्त्र को अपनी सुविधा के अनुसार मोड़ लिया।

अंतिम उत्तर:
चूड़ाकर्म यानी मुंडन; भक्तिन ने ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’ को शास्त्र का वचन बताकर अपने सिर घुटाने को उचित ठहराया।
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