Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

“तर्क-वितर्क करने की कला का शिक्षा से कोई संबंध नहीं है।” भक्तिन के व्यक्तित्व के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

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हस्ताक्षर न सीखने का तर्क (‘मलकिन तौ रात-दिन कितबियन माँ गड़ी रहती हैं’), ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’ और पैसे सँभाल लेने की दलील याद कीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कथन का आशय :
कथन का अर्थ है कि अपनी बात को दलील देकर सही ठहराने की क्षमता किताबी शिक्षा से नहीं, जीवन के अनुभव और सहज बुद्धि से आती है। महादेवी वर्मा के संस्मरण ‘भक्तिन’ की नायिका भक्तिन अनपढ़ है, फिर भी तर्क में उससे कोई जीत नहीं पाता।

चरण 2: पाठ से प्रमाण :
जब महादेवी ने सब काम करने वालों से अँगूठे के निशान की जगह हस्ताक्षर लेने का नियम बनाया, तो भक्तिन ने तर्क दिया : ‘हमारे मलकिन तौ रात-दिन कितबियन माँ गड़ी रहती हैं। अब हमहूँ पढ़ै लागब तो घर-गिरिस्ती कउन देखी-सुनी।’ इस तर्क से वह पढ़ने से बच गई।
सिर घुटाने से रोके जाने पर उसने ‘शास्त्र’ का हवाला देकर कहा : ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध।’ इधर-उधर पड़े पैसे सँभालकर रख लेने को वह चोरी नहीं मानती, क्योंकि ‘यह उसका अपना घर ठहरा’।

चरण 3: लगभग 60 शब्दों का उत्तर :
भक्तिन अनपढ़ होकर भी हर बात का तर्क ढूँढ़ लेती है। हस्ताक्षर सीखने से बचने के लिए उसने कहा कि मालकिन तो दिन-रात किताबों में गड़ी रहती हैं, वह भी पढ़ने लगे तो घर-गृहस्थी कौन देखेगा। सिर मुँड़ाने को ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’ कहकर और पैसे रख लेने को ‘अपना घर’ कहकर सही ठहराती है। लेखिका के अनुसार वह तर्कहीनता के लिए भी प्रमाण खोज लेने में पटु है।

अंतिम उत्तर:
अशिक्षित भक्तिन की ये दलीलें सिद्ध करती हैं कि तर्क-वितर्क की कला का शिक्षा से कोई संबंध नहीं है।
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