Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘बिना त्याग के दान नहीं होता।’ ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के इस कथन के आधार पर जीवन में त्याग और दान के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।

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जीजी के तर्क और इंदर सेना पर पानी डालने के उदाहरण से समझाइए कि त्याग के बिना दान सार्थक नहीं होता।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘काले मेघा पानी दे’ धर्मवीर भारती का संस्मरणात्मक निबंध है, जो ‘आरोह भाग-2’ में है। इसमें लेखक की जीजी इंदर सेना पर पानी डालने को त्याग और दान से जोड़कर समझाती हैं। प्रश्न की पंक्ति जीजी के इसी तर्क से ली गई है।

चरण 2: कथन का अर्थ:
जीजी का कहना है कि दान तभी सच्चा होता है जब हम अपनी किसी उपयोगी वस्तु का एक अंश दूसरों या समाज के हित में छोड़ें। जो चीज़ हमारे पास फालतू है, उसे देना त्याग नहीं कहलाता।

चरण 3: जीवन में त्याग और दान का स्वरूप:
त्याग का अर्थ है अपने सुख या स्वार्थ का कुछ भाग छोड़ना। यही त्याग जब समाज के कल्याण के लिए हो, तब दान बनता है। जैसे किसान बीज बोता है तो पहले अपने अनाज का कुछ भाग मिट्टी में दे देता है, तभी बाद में फसल मिलती है।

चरण 4: लगभग 60 शब्दों का आदर्श उत्तर:
त्याग के बिना दान केवल दिखावा है। जो वस्तु हमारे लिए मूल्यवान हो, उसमें से कुछ भाग समाज के हित में देना ही सच्चा दान है। लेखक के अनुसार इंदर सेना पर डाला गया पानी बीज बोने जैसा त्याग है। आज सब अधिकार माँगते हैं, कर्तव्य नहीं निभाते।

अंतिम उत्तर:
अपनी प्रिय और उपयोगी वस्तु का अंश समाज के लिए छोड़ना त्याग है, और यही त्याग दान को सच्चा स्वरूप देता है।
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