Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

भक्तिन के जीवन में धर्म और आस्था की क्या भूमिका थी ? पाठ के आधार पर लिखिए।

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कंठी-माला से मिला नाम, विधवा होने पर गुरु-मंत्र, कंठी और मुँडा सिर, स्नान-जप और चौके की छूत, तथा ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’ वाला सुविधाजनक शास्त्र लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘भक्तिन’ महादेवी वर्मा का संस्मरणात्मक रेखाचित्र है, जो ‘आरोह भाग-2’ में है। भक्तिन का असली नाम लछमिन (लक्ष्मी) था। लेखिका ने उसकी कंठी-माला देखकर उसका नाम भक्तिन रखा।

चरण 2: धार्मिक आचरण:
पति की मृत्यु के बाद जेठ-जिठौत चाहते थे कि वह दूसरा विवाह कर ले ताकि संपत्ति उन्हें मिले। तब उसने गुरु से कान फुँकवाए, कंठी बाँधी और अपने केश पति के नाम पर समर्पित कर दिए। लेखिका के घर आकर वह तड़के स्नान करती, सूर्य और पीपल को जल चढ़ाती, जप करती और कोयले की रेखा खींचकर चौके को छूत से बचाती थी।

चरण 3: आस्था का व्यावहारिक रूप:
शास्त्र का प्रश्न भी वह अपनी सुविधा से सुलझा लेती थी। लेखिका ने सिर घुटाने से रोका तो बोली कि शास्त्र में लिखा है: ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’। वह लेखिका की सेवा को अपना धर्म मानती थी, इसीलिए लेखिका उसे सेवक-धर्म में हनुमान जी से होड़ करने वाली कहती है।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 60 शब्द):
भक्तिन के लिए धर्म जीवन का सहारा और ढाल दोनों था। विधवा होने पर उसने गुरु से कान फुँकवाकर कंठी बाँधी और केश मुँडाए, ताकि दोबारा विवाह का दबाव न रहे और संपत्ति बची रहे। वह स्नान, जप, सूर्य को जल और चौके की छूत मानती थी। शास्त्र को वह सुविधा से ढाल लेती थी और सेवा को अपना धर्म मानती थी।

अंतिम उत्तर:
धर्म और आस्था भक्तिन की पहचान, आत्मरक्षा का साधन और सेवा-भाव का आधार थे, पर उसका धर्म सुविधा के अनुसार ढला हुआ व्यावहारिक धर्म था।
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