Question:

“लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप” प्रसंग के आधार पर रावण और कुंभकरण के बीच हुए संवाद के दृश्य को लगभग 40 शब्दों में लिखिए।

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रावण द्वारा कुंभकरण को जगाना, सीता-हरण और योद्धाओं की मृत्यु की बात बताना तथा कुंभकरण की फटकार को संवाद में लिखें।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझें:
यह प्रसंग तुलसीदास के रामचरितमानस के लंका कांड से लिया गया है, जो पाठ्यपुस्तक आरोह में संकलित है।
हनुमान संजीवनी लेकर लौटे, लक्ष्मण होश में आए और वानर सेना में उत्साह छा गया। यह समाचार सुनकर रावण अत्यंत दुखी हुआ और व्याकुल होकर कुंभकरण को अनेक उपाय करके जगाया।

चरण 2: संवाद के मुख्य भाव:
कुंभकरण रावण से उसके उदास मुख का कारण पूछता है। रावण सीता-हरण की पूरी कथा और अपने बड़े-बड़े योद्धाओं के मारे जाने की बात बताता है। यह सुनकर कुंभकरण दुखी होकर रावण को धिक्कारता है कि जगत की माता को हरकर अब वह कल्याण चाहता है।

चरण 3: संवाद-दृश्य (लगभग 40 शब्द):
(रावण व्याकुल होकर कुंभकरण को जगाता है।)
कुंभकरण : भाई, तुम्हारा मुख इतना सूखा क्यों है?
रावण : मैंने सीता का हरण किया। वानरों ने हमारे अनेक महान योद्धा मार डाले हैं।
कुंभकरण : (दुखी होकर) अरे मूर्ख! जगत की माता को हरकर अब कल्याण चाहते हो?

अंतिम उत्तर:
ऊपर दिया गया संवाद-दृश्य रावण की व्याकुलता और कुंभकरण की फटकार को प्रसंग के अनुसार प्रस्तुत करता है।
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