Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 40 शब्दों में निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में रेडियो नाटक की क्या-क्या सीमाएँ हैं ?

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रेडियो केवल श्रव्य माध्यम है, इसलिए दृश्य, अभिनय, पात्र-संख्या और अवधि की दृष्टि से उसकी सीमाएँ सोचिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: रेडियो का स्वरूप समझें:
रेडियो केवल श्रव्य माध्यम है, इसमें दृश्य नहीं होते।
सिनेमा और टेलीविज़न दृश्य-श्रव्य माध्यम हैं, जिनमें देखना और सुनना दोनों होता है।

चरण 2: रेडियो नाटक की सीमाएँ:
रेडियो नाटक में मंच-सज्जा, वेशभूषा, चेहरे के भाव और अभिनय दिखाई नहीं देते।
पूरी कथा केवल संवाद, ध्वनि-प्रभाव और संगीत के सहारे कहनी पड़ती है।
पात्रों की संख्या सीमित (प्रायः पाँच-छह) रखनी पड़ती है, नहीं तो श्रोता आवाज़ों में उलझ जाता है। नाटक की अवधि भी छोटी रखनी पड़ती है।

अंतिम उत्तर:
रेडियो नाटक में दृश्य, वेशभूषा और अभिनय का अभाव रहता है, सब कुछ आवाज़ से कहना पड़ता है और पात्र तथा अवधि सीमित रहते हैं।
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