Question:

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए: (i) 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ में झोंपड़ी में आग लगने के बावजूद सूरदास बार-बार झोंपड़ी में जाने का प्रयास क्यों कर रहा था? यदि आप सूरदास की जगह होते तो क्या करते? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। (ii) 'बिस्कोहर की माटी' पाठ में वर्णित उस स्त्री के सौंदर्य का उल्लेख कीजिए जिसे देखकर लेखक ने कहा कि प्रकृति सजीव नारी बन गई। (iii) 'डग-डग रोटी पग-पग नीर वाले' मालवा की वर्तमान स्थिति का वर्णन 'अपना मालवा खाऊ .......' पाठ के आधार पर कीजिए।

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(i) में रुपयों की पोटली और उससे जुड़े सपने, फिर अपनी राय, (ii) में बरसात की चाँदनी और जूही की सुगंध वाली उपमा, (iii) में गाद भरे तालाब और नालों में बदली नदियाँ लिखिए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझना:
तीन उपप्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखने हैं। नीचे तीनों के आदर्श उत्तर हैं।

चरण 2: उत्तर (i) सूरदास बार-बार झोंपड़ी में क्यों जाना चाहता था:
झोंपड़ी में आग लगने पर सूरदास दौड़ा आया और बार-बार पूछता रहा कि क्या झोंपड़े में जाने का कोई रास्ता नहीं है। बजरंगी और नायकराम ने उसे रोका। उसे झोंपड़ी या बरतनों के जलने का दुख नहीं था। दुख उस पोटली का था जो छप्पर में रखी थी और जिसमें उसकी उम्र भर की कमाई, पाँच सौ से कुछ ऊपर रुपये थे। उन्हीं से वह गया जाकर पितरों का पिंडदान करना, मिठुआ का ब्याह करना और कुआँ बनवाना चाहता था। यदि मैं उसकी जगह होता तो जलती आग में घुसकर जान जोखिम में न डालता, क्योंकि जीवन रहेगा तो धन फिर कमाया जा सकता है। मैं आग बुझने तक धैर्य रखता, फिर सामान खोजता और मेहनत से नया घर बनाता। साथ ही भविष्य में अपनी बचत किसी सुरक्षित जगह, जैसे बैंक या डाकघर में रखता।

चरण 3: उत्तर (ii) स्त्री का सौंदर्य:
लेखक बिसनाथ ने उस स्त्री को पहली बार दस वर्ष की उम्र में एक रिश्तेदार के यहाँ देखा। वह उनसे लगभग दस वर्ष बड़ी थी। उसे देखकर लगा मानो बरसात की चाँदनी रात में जूही की खुशबू आ रही हो। वह स्त्री उन्हें स्त्री के रूप में नहीं, बल्कि जूही की लता बन गई चाँदनी के रूप में दिखी, जिसके फूलों की सुगंध आ रही थी। चाँदनी, फूल और खुशबू सब प्रकृति के रूप थे। इसलिए लेखक को लगा कि प्रकृति सजीव नारी बन गई है और वे उसमें आकाश, चाँदनी और सुगंध सब देख रहे थे। उसका सौंदर्य भरी चाँदनी जैसा मधुर, कोमल और शीतल था।

चरण 4: उत्तर (iii) मालवा की वर्तमान स्थिति:
पुराने समय में मालवा के लिए कहावत थी, 'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर'। प्रभाष जोशी बताते हैं कि आज के नियोजकों और इंजीनियरों ने तालाबों को गाद से भर जाने दिया और ज़मीन का पानी पाताल से भी निकाल लिया। नदी-नाले सूख गए और पग-पग नीर वाला मालवा सूखा हो गया। शिप्रा, चंबल, गंभीर, पार्वती, कालीसिंध और चोरल जैसी सदानीरा नदियाँ अब केवल चौमासे में चलती हैं, बाकी महीनों में बस्तियों के गंदे नालों का पानी ढोती हैं। लेखक के अनुसार यह खाऊ-उजाड़ू सभ्यता का परिणाम है।

अंतिम उत्तर:
तीनों उत्तर ऊपर हैं और परीक्षार्थी इनमें से कोई दो लिखकर प्रश्न पूरा कर सकता है।
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