Question:

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए: (i) 'सूरदास सोच रहा था - रुपए मैंने ही तो कमाए थे, क्या फिर नहीं कमा सकता ?' पाठ में सूरदास द्वारा यह कथन किस संदर्भ में कहा गया? इस कथन के आलोक में सूरदास के चरित्र की विवेचना कीजिए। (ii) 'बिस्कोहर की माटी' पाठ के कथानक की समीक्षा कीजिए। (iii) आज पर्यावरण की जो स्थिति है उसके लिए 'अपना मालवा खाऊ उजाड़ू ......' पाठ में किसे उत्तरदायी ठहराया गया है और क्यों? इस विषय में आपका क्या दृष्टिकोण है?

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(i) में याद रखिए कि रुपये भैरों चुरा ले गया था और सूरदास ने यह बात मन में सोची थी। (iii) में यूरोप-अमेरिका की खाऊ-उजाड़ू सभ्यता और आज के इंजीनियरों की भूमिका बताइए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का रूप:
तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखने हैं। यहाँ तीनों के आदर्श उत्तर दिए गए हैं, विद्यार्थी कोई दो चुन सकता है।

चरण 2: (i) सूरदास का कथन, संदर्भ और चरित्र:
प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' के अंश 'सूरदास की झोंपड़ी' में भैरों ने बदला लेने के लिए सूरदास की झोंपड़ी में आग लगा दी और उसकी पाँच सौ से कुछ अधिक रुपयों की थैली उठा ले गया। इन रुपयों से सूरदास गया जाकर पितरों का पिंडदान करना और मिठुआ की सगाई करना चाहता था। जब सुभागी ने कहा कि वह उसके रुपये दिलाकर रहेगी, तब सूरदास मन में सोच रहा था कि रुपये मैंने ही तो कमाए थे, क्या फिर नहीं कमा सकता? यह कथन उसके आत्मविश्वास, परिश्रम पर भरोसे, संतोष और क्षमाशीलता को दिखाता है। वह बदला नहीं सोचता, उल्टे सुभागी की चिंता करता है। अंत में वह मिठुआ से कहता है कि कोई सौ लाख बार आग लगाए तो हम सौ लाख बार घर बनाएँगे। वह जीवन को खेल मानने वाला सच्चा खिलाड़ी है।

चरण 3: (ii) 'बिस्कोहर की माटी' के कथानक की समीक्षा:
यह पाठ विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का अंश है। इसके केंद्र में लेखक का गाँव बिस्कोहर और 'बिसनाथ' नाम का पात्र है, जो स्वयं लेखक है। इसमें माँ, गाँव और प्रकृति की यादें हैं। अकाल में खाई जाने वाली कमल-ककड़ी, बाढ़ से बेहाल गाँव, कमल, कोइयाँ, हरसिंगार जैसे फूल, तरह-तरह के साँप और बिच्छू, तथा फूल-पत्तियों से बनी देसी दवाइयों का वर्णन है। गर्मी, वर्षा और शरद ऋतु की कठिनाइयाँ भी आई हैं। कथानक घटनाओं की कड़ी नहीं, स्मृतियों का प्रवाह है। आंचलिक भाषा और आत्मकथात्मक शैली इसे रोचक और आत्मीय बनाती है।

चरण 4: (iii) पर्यावरण की दशा के लिए उत्तरदायी कौन:
प्रभाष जोशी के पाठ 'अपना मालवा - खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में' के अनुसार इसकी ज़िम्मेदार यूरोप और अमेरिका की देन खाऊ-उजाड़ू सभ्यता है, जिसे हम विकास की औद्योगिक सभ्यता कहते हैं, पर लेखक उसे उजाड़ की अपसभ्यता कहता है। इसी के कारण धरती का वातावरण गरम हो रहा है, समुद्र का पानी गरम हो रहा है और ध्रुवों की बर्फ पिघल रही है। लेखक आज के नियोजकों और इंजीनियरों को भी दोषी ठहराता है, जिन्होंने तालाबों को गाद से भर जाने दिया और ज़मीन का पानी पाताल तक से निकाल लिया। इसी से 'डग-डग रोटी, पग-पग नीर' वाला मालवा सूखने लगा। मेरा मत है कि हमें उपभोग घटाकर जल, जंगल और ज़मीन का संरक्षण करना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
तीनों उत्तर लगभग 100 शब्दों के हैं। परीक्षा में इनमें से कोई दो लिखना पर्याप्त है।
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