Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 100 शब्दों में उत्तर दीजिए :

‘जूझ’ कहानी आज के युवाओं के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करने की एक प्रेरक कथा है। उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।

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पिता का विरोध, दत्ता जी राव की मदद, स्कूल में सहपाठियों का मज़ाक और सौंदलगेकर मास्टर की प्रेरणा को उदाहरण बनाइए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का परिचय:
‘जूझ’ आनंद यादव के बहुचर्चित आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है, जो ‘वितान’ भाग 2 में संकलित है।
इसमें एक किसान परिवार के बालक के पढ़ाई के लिए किए गए संघर्ष का वर्णन है।

चरण 2: प्रतिकूल परिस्थितियाँ:
लेखक के पिता (दादा) उसे पढ़ाने के बजाय खेती के काम में लगाए रखना चाहते थे।
लेखक ने माँ की सहायता से दत्ता जी राव देसाई से बात की, जिन्होंने पिता को समझाया।
उसे यह शर्त माननी पड़ी कि वह स्कूल जाने के साथ-साथ खेत और घर के काम में भी हाथ बँटाएगा।

चरण 3: संघर्ष और सफलता:
स्कूल के नए वातावरण में उसे शरारती सहपाठियों का मज़ाक सहना पड़ा, पर वह डटा रहा।
वसंत पाटील को देखकर उसने मन लगाकर पढ़ाई की और मराठी अध्यापक न. वा. सौंदलगेकर से प्रेरित होकर कविता लिखने लगा।
खेत पर ढोर चराते हुए भी वह कविताएँ रचता और गाता था।

अंतिम उत्तर (लगभग 100 शब्द):
‘जूझ’ का नायक गरीबी, पिता के विरोध और खेती के बोझ के बीच भी पढ़ने की ज़िद नहीं छोड़ता। वह माँ और दत्ता जी राव की मदद से स्कूल पहुँचता है और खेत तथा पढ़ाई दोनों का भार उठाता है। कक्षा में उपहास सहकर भी वह वसंत पाटील जैसा बनने का प्रयास करता है और सौंदलगेकर मास्टर की प्रेरणा से कविता की राह पर चल पड़ता है। आज के युवा भी कठिनाइयों से घबरा जाते हैं। यह कहानी सिखाती है कि लगन, धैर्य और परिश्रम से हर बाधा पार की जा सकती है। इसलिए ‘जूझ’ युवाओं के लिए प्रेरक कथा है।
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