Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

“कवि भी अपने जैसा ही एक हाड़-माँस का; क्रोध-लोभ का मनुष्य ही होता है।” ‘जूझ’ कहानी के लेखक को यह अहसास कब हुआ और इस अहसास का क्या परिणाम निकला ?

Show Hint

सौंदलगेकर मास्टर स्वयं कवि थे और कवियों के संस्मरण सुनाते थे। इससे लेखक में आत्मविश्वास आया और वह भैंस चराते हुए तुकबंदी करके मास्टर को कविताएँ दिखाने लगा।
Updated On: Oct 27, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘जूझ’ आनंद यादव के आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है, जो ‘वितान भाग-2’ में है। पाठशाला में मराठी पढ़ाने वाले न.वा. सौंदलगेकर मास्टर कविता बड़े सुर और अभिनय के साथ पढ़ाते थे और लेखक उनसे बहुत प्रभावित था।

चरण 2: अहसास कब हुआ:
मास्टर स्वयं कविता करते थे। उनके घर में अनेक मराठी कवियों के काव्य-संग्रह थे और वे उन कवियों के चरित्र और संस्मरण सुनाया करते थे। इससे कवि लोग लेखक को ‘आदमी’ ही लगने लगे। खुद मास्टर को कवि के रूप में देखकर उसे विश्वास हुआ कि कवि भी अपने जैसा हाड़-माँस का, क्रोध-लोभ वाला मनुष्य ही होता है। मास्टर ने अपने दरवाज़े पर छाई मालती की बेल पर कविता लिखी थी, जिसे लेखक ने देखा था।

चरण 3: अहसास का परिणाम:
लेखक को लगा कि वह भी कविता कर सकता है और उसके गाँव, खेतों और आसपास भी ऐसे कई दृश्य हैं। वह भैंस चराते-चराते फ़सलों और जंगली फूलों पर तुकबंदी करने लगा, उन्हें ज़ोर से गुनगुनाता और मास्टर को दिखाने लगा। वह जेब में कागज़-पेंसिल रखने लगा; ये न होते तो लकड़ी के टुकड़े से भैंस की पीठ पर या कंकड़ से पत्थर की शिला पर लिख लेता।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
लेखक के मराठी अध्यापक सौंदलगेकर स्वयं कवि थे। वे मराठी कवियों के चरित्र और संस्मरण सुनाते थे, जिससे कवि उसे साधारण आदमी लगने लगे। मास्टर को कविता रचते देखकर, जैसे उनके दरवाज़े की मालती की बेल पर लिखी कविता, उसे अहसास हुआ कि कवि भी हाड़-माँस का, क्रोध-लोभ वाला मनुष्य होता है। परिणाम यह हुआ कि उसे लगा वह भी कविता कर सकता है। वह भैंस चराते हुए फ़सलों और जंगली फूलों पर तुकबंदी करने लगा, भैंस की पीठ या पत्थर पर लिखने लगा और कविताएँ मास्टर को दिखाने लगा। मास्टर से छंद, अलंकार और शुद्ध लेखन सीखकर उसकी मराठी भी सुधरने लगी।

अंतिम उत्तर:
सौंदलगेकर मास्टर को कवि के रूप में निकट से देखकर यह अहसास हुआ और इससे लेखक में स्वयं कविता रचने का आत्मविश्वास जागा।
Was this answer helpful?
0
0

Top CBSE CLASS XII Hindi Course-A Questions

View More Questions

Top CBSE CLASS XII जूझ Questions

View More Questions