Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘जूझ’ कहानी के आधार पर लिखिए सारे गाँव भर में आनंदा के पिता का कोल्हू सबसे पहले क्यों चलता था ? गाँव के बाकी किसानों का इस विषय में क्या मत था ? आपकी दृष्टि में दोनों में से किसकी सोच अधिक महत्त्वपूर्ण और उचित है और क्यों ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Show Hint

दादा भाव को महत्त्व देते थे, किसान गुड़ की मात्रा को। दोनों तर्क लिखकर अपना तर्कपूर्ण मत दीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
‘जूझ’ आनंद यादव के आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है, जो वितान भाग-2 में है। कथा-नायक आनंदा के पिता को कहानी में ‘दादा’ कहा गया है। दीवाली के बाद महीने भर ईख पेरने का कोल्हू चलता था।

चरण 2: पिता का कोल्हू सबसे पहले क्यों चलता था:
दादा की समझ थी कि कोल्हू जल्दी शुरू करने से ईख की अच्छी-खासी कीमत मिल जाती है। जब चारों ओर कोल्हू चलने लगते हैं तो बाज़ार में गुड़ की बहुतायत हो जाती है और भाव नीचे उतर आते हैं। उस समय खेतों पर बने ‘नंबर तीन’ के गुड़ को कोई नहीं पूछता। इसलिए वे गुड़ ज़्यादा निकलने के बजाय भाव ज़्यादा मिलने को महत्त्व देते थे।

चरण 3: बाकी किसानों का मत:
बाकी किसानों का मत था कि ईख को कुछ दिन और खेत में खड़ी रहने दिया जाए तो गुड़ ज़्यादा निकलता है, क्योंकि देर तक खड़ी ईख के रस में पानी कम होता है और रस गाढ़ा हो जाता है।

चरण 4: अधिक उचित सोच:
मेरी दृष्टि में दादा की सोच अधिक व्यावहारिक है। छोटे किसान के लिए अधिक मात्रा से अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि उसकी उपज का सही दाम मिले। बाज़ार में गुड़ भर जाने पर अधिक गुड़ भी कम दाम में बिकता है। लेखक ने भी लिखा है कि दादा की यह समझ कुछ हद तक सही थी। फिर भी किसानों की बात भी तर्कहीन नहीं है, इसलिए दोनों का संतुलन सबसे अच्छा होगा।

अंतिम उत्तर:
दादा अच्छे भाव के लिए कोल्हू सबसे पहले चलाते थे, जबकि अन्य किसान अधिक गुड़ पाने के लिए ईख देर तक खड़ी रखना ठीक मानते थे; बाज़ार की समझ के कारण दादा की सोच अधिक उचित है।
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