List of top Questions asked in UP Board XII

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : "अशोक-वृक्ष की पूजा इन्हीं गन्धर्वों और यक्षों की देन है। प्राचीन साहित्य में इस वृक्ष की पूजा के उत्सवों का बड़ा सरस वर्णन मिलता है। असल पूजा अशोक की नहीं, बल्कि उसके अधिष्ठाता कन्दर्प-देवता की होती थी। इसे 'मदनोत्सव' कहते थे। महाराज भोज के 'सरस्वती-कण्ठाभरण' से जान पड़ता है कि यह उत्सव त्रयोदशी के दिन होता था। 'मालविकाग्निमित्र' और 'रत्नावली' में इस उत्सव का बड़ा सरस-मनोहर वर्णन मिलता है। मैं जब अशोक के लाल स्तवकों को देखता हूँ, तो मुझे वह पुराना वातावरण प्रत्यक्ष दिखायी दे जाता है।" (i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए। (ii) अशोक-वृक्ष की पूजा किसकी देन है? (iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (iv) 'मदनोत्सव' किसे कहते हैं? (v) 'सरस्वती-कण्ठाभरण' किसकी रचना है?
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए : "राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबन्धमात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि सम्भव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ-साथ जन की संस्कृति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यदि भूमि और जन अपनी संस्कृति से विरहित कर दिये जायँ, तो राष्ट्र का लोप समझना चाहिए।" (i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए। (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (iii) मनुष्य के जीवन की श्वास-प्रश्वास क्या है? (iv) राष्ट्र का लोप कब समझना चाहिए? (v) राष्ट्र की वृद्धि कैसे सम्भव है?