निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : "सामने टिकते नहीं वनराज, पर्वत डोलते हैं, काँपता है कुंडली मारे समय का व्याल, मेरी बाँह में मारुत, गरण, गजराज का बल है। मर्त्य मानव की विजय का तूर्य हूँ मैं, उर्वशी! अपने समय का सूर्य हूँ मैं। अंध तम के भाल पर पावक जलाता हूँ, बादलों के सीस पर स्यन्दन चलाता हूँ।" (i) उपर्युक्त पद्यांश के पाठ और कवि का नाम लिखिए। (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (iii) राजा पुरुरवा अपने मन की स्थिति का वर्णन किससे कर रहे हैं? (iv) 'व्याल' और 'स्यन्दन' शब्द का अर्थ लिखिए। (v) 'मारुत' और 'पावक' किसके पर्यायवाची शब्द हैं?