'वेद-पुराण' में समास है :
Step 1: Identify relation.
'वेद' और 'पुराण'—दो स्वतंत्र पद समान-स्तर पर और से जुड़े हैं; अर्थ—"वेद तथा पुराण"।
Step 2: Apply rule.
समपद बहुवचनार्थक समाहार होने पर द्वन्द्व समास बनता है; अतः (3) सही।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'करुण रस' का स्थायीभाव है :
'पीपर पत सरिस मन डोला' में अलंकार है :
"मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।"
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :
'अनुचर' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है :
प्रत्यय के प्रकार हैं :