"मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।"
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :
Step 1: छन्द-लक्षण मिलान.
दोहा-परिवार का सौरठा छन्द 24 मात्राएँ (13+11) के विन्यास के साथ आता है, किन्तु दुति/गति-भेद से अंत्यानुप्रास-विन्यास भिन्न होता है।
Step 2: पंक्तियों का विन्यास.
दोहा-सदृश मात्रा-विन्यास होते हुए यति/तुकान्त के कारण यह सौरठा के रूप में प्रतिष्ठित है; अतः (2) सही।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'करुण रस' का स्थायीभाव है :
'पीपर पत सरिस मन डोला' में अलंकार है :
'अनुचर' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है :
प्रत्यय के प्रकार हैं :
'वेद-पुराण' में समास है :