"मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।"
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :
Step 1: छन्द-लक्षण मिलान.
दोहा-परिवार का सौरठा छन्द 24 मात्राएँ (13+11) के विन्यास के साथ आता है, किन्तु दुति/गति-भेद से अंत्यानुप्रास-विन्यास भिन्न होता है।
Step 2: पंक्तियों का विन्यास.
दोहा-सदृश मात्रा-विन्यास होते हुए यति/तुकान्त के कारण यह सौरठा के रूप में प्रतिष्ठित है; अतः (2) सही।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है