'करुण रस' का स्थायीभाव है :
Step 1: Recall ras–sthāyibhāva pairs.
करुण रस का स्थायीभाव शोक माना गया है (दुःख/विरह से उत्पन्न)।
Step 2: Eliminate others.
भय — भयानक रस; विस्मय — अद्भुत रस; निर्वेद — शान्त रस से सम्बद्ध। इसलिए (4) सही है।
'रस मीमांसा' के लेखक हैं
'तितली' कृति की विधा है :
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :
'साहित्य और कला' रचना है :
शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :
'पीपर पत सरिस मन डोला' में अलंकार है :
"मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।"
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :
'अनुचर' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है :
प्रत्यय के प्रकार हैं :
'वेद-पुराण' में समास है :