'करुण रस' का स्थायीभाव है :
Step 1: Recall ras–sthāyibhāva pairs.
करुण रस का स्थायीभाव शोक माना गया है (दुःख/विरह से उत्पन्न)।
Step 2: Eliminate others.
भय — भयानक रस; विस्मय — अद्भुत रस; निर्वेद — शान्त रस से सम्बद्ध। इसलिए (4) सही है।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
नवरत्न' में समास है