उहाँ राम लछिमनहि निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।
अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायऊ।।
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।
मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।
सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
‘बोले बचन मनुज अनुसारी’ का अभिप्राय है –
‘सकहु न दुखित ......... मृदुल सुभाऊ’ चौपाई के आधार पर लक्ष्मण के स्वभाव की विशेषताएँ हैं –
‘सो अनुराग कहाँ अब भाई’ पंक्ति द्वारा राम लक्ष्मण के हृदय में विद्यमान किस भाव की ओर संकेत कर रहे हैं ?
लक्ष्मण के हृदय में राम के प्रति अगाध प्रेम को व्यक्त करने वाली पंक्ति है –
काव्यांश का केंद्रीय भाव है –