Comprehension

उहाँ राम लछिमनहि निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।

अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायऊ।।

सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।

मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।

सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।

Question: 1

‘बोले बचन मनुज अनुसारी’ का अभिप्राय है –

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ईश्वर होते हुए भी राम यहाँ किसकी तरह विलाप कर रहे हैं, यह सोचिए।
  • मनुष्य द्वारा बोले जाने योग्य वचन
  • मनुष्य द्वारा अनुसरण करने योग्य वचन
  • मानव की प्रकृति के अनुरूप वचन
  • मानव सुलभ गुणों से युक्त वचन
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह अंश गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के लंका कांड से लिया गया 'लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप' प्रसंग है।
लक्ष्मण शक्ति-बाण से मूर्च्छित हैं और हनुमान संजीवनी लेने गए हैं।
आधी रात बीतने पर भी हनुमान नहीं लौटे, तब राम दुखी होकर विलाप करते हैं।

चरण 2: पंक्ति का अर्थ:
पंक्ति है 'उहाँ राम लछिमनहि निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।'
राम ईश्वर के अवतार हैं, पर यहाँ वे एक साधारण मनुष्य की तरह भाई के दुख में व्याकुल होकर बोलते हैं।
'मनुज अनुसारी' का अर्थ है मनुष्य के स्वभाव के अनुसार।

चरण 3: विकल्पों की जाँच:
विकल्प 1 और 2 में बोलने या अनुसरण करने योग्य वचन की बात है, जो पंक्ति का भाव नहीं है।
विकल्प 4 में मानव सुलभ गुणों की बात है, पर पंक्ति गुणों पर नहीं, मानव प्रकृति के अनुरूप व्यवहार पर बल देती है।
इसलिए विकल्प 3 सबसे सटीक है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 : मानव की प्रकृति के अनुरूप वचन।
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Question: 2

‘सकहु न दुखित ......... मृदुल सुभाऊ’ चौपाई के आधार पर लक्ष्मण के स्वभाव की विशेषताएँ हैं –

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चौपाई में आए 'मृदुल' शब्द और भाई का दुख न देख पाने के भाव पर ध्यान दीजिए।
  • स्नेही, मृदुल, भ्रातृ-प्रेमी
  • मृदुल, आज्ञाकारी, कोमलचित्त
  • कोमल, स्नेही, आज्ञाकारी
  • कोमल, उदार, सहनशील
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
तुलसीदास के 'लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप' अंश में राम मूर्च्छित लक्ष्मण को देखकर उनके गुण याद करते हैं।
चौपाई है 'सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।'

चरण 2: चौपाई का अर्थ:
राम कहते हैं कि हे भाई, तुम मुझे कभी दुखी नहीं देख सकते थे।
तुम्हारा स्वभाव सदा कोमल रहा है।
इससे लक्ष्मण का स्नेह, उनका मृदुल यानी कोमल स्वभाव और बड़े भाई के प्रति प्रेम तीनों प्रकट होते हैं।

चरण 3: अन्य विकल्प क्यों गलत:
विकल्प 2 और 3 में 'आज्ञाकारी' गुण है, जिसका इस चौपाई में उल्लेख नहीं है।
विकल्प 4 में 'उदार' और 'सहनशील' गुण हैं, जो इस चौपाई से सीधे नहीं निकलते।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 : स्नेही, मृदुल, भ्रातृ-प्रेमी।
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Question: 3

‘सो अनुराग कहाँ अब भाई’ पंक्ति द्वारा राम लक्ष्मण के हृदय में विद्यमान किस भाव की ओर संकेत कर रहे हैं ?

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'सो अनुराग' को अगली पंक्ति 'उठहु न सुनि मम बच बिकलाई' और पहली चौपाई 'सकहु न दुखित देखि मोहि' से जोड़कर देखिए।
  • बड़े भाई को कभी दुखी न देखने का भाव
  • सबके प्रति हृदय में विद्यमान कोमलता का भाव
  • बड़े भाई के प्रति कर्तव्यपालन का भाव
  • बड़े भाई के प्रति त्याग युक्त प्रेम का भाव
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
तुलसीदास के 'लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप' में राम मूर्च्छित लक्ष्मण से कहते हैं 'सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।'
अर्थात हे भाई, अब तुम्हारा वह प्रेम कहाँ गया, तुम मेरे व्याकुल वचन सुनकर भी नहीं उठते।

चरण 2: 'वह अनुराग' कौन-सा है:
पहले राम ने कहा था 'सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ', यानी तुम मुझे कभी दुखी नहीं देख सकते थे।
अब राम दुखी होकर पुकार रहे हैं, फिर भी लक्ष्मण नहीं उठते।
इसलिए राम उसी प्रेम की याद दिला रहे हैं जिसके कारण लक्ष्मण बड़े भाई को कभी दुखी नहीं देख पाते थे।

चरण 3: अन्य विकल्पों की जाँच:
विकल्प 2 में सबके प्रति कोमलता की बात है, पर यहाँ बात केवल राम के प्रति प्रेम की है।
विकल्प 3 में कर्तव्यपालन का भाव है, पर पंक्ति में 'अनुराग' यानी प्रेम कहा गया है, कर्तव्य नहीं।
विकल्प 4 त्याग का भाव पिछली चौपाई से जुड़ता है, पर 'उठहु न सुनि मम बच बिकलाई' से सीधा मेल पहले विकल्प का ही बनता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 : बड़े भाई को कभी दुखी न देखने का भाव।
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Question: 4

लक्ष्मण के हृदय में राम के प्रति अगाध प्रेम को व्यक्त करने वाली पंक्ति है –

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उस पंक्ति को खोजिए जिसमें बताया गया है कि लक्ष्मण राम को कभी दुखी नहीं देख सकते थे।
  • अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ ......
  • सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा ......
  • मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन ......
  • सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि ......
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह काव्यांश गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के लंका कांड से लिया गया है, जो आरोह भाग 2 में ‘लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप’ शीर्षक से संकलित है।
शक्तिबाण लगने से लक्ष्मण मूर्च्छित हैं और हनुमान संजीवनी लेने गए हैं। आधी रात बीत जाने पर राम विलाप करते हैं।

चरण 2: प्रश्न की माँग:
प्रश्न में वह पंक्ति पूछी गई है जिससे लक्ष्मण के मन में राम के प्रति गहरे प्रेम का पता चले।
अर्थात पंक्ति में लक्ष्मण का स्वभाव और व्यवहार राम के प्रति प्रेम के रूप में दिखना चाहिए।

चरण 3: विकल्प (2) की जाँच:
‘सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।’
राम कहते हैं कि हे भाई, तुम मुझे कभी दुखी नहीं देख सकते थे, तुम्हारा स्वभाव सदा कोमल रहा।
राम को दुखी न देख पाना ही लक्ष्मण के अगाध प्रेम का सीधा प्रमाण है। इसलिए यही सही उत्तर है।

चरण 4: अन्य विकल्पों की जाँच:
विकल्प (1) में केवल समय और हनुमान के न लौटने तथा राम द्वारा लक्ष्मण को हृदय से लगाने का वर्णन है।
विकल्प (3) में लक्ष्मण के त्याग का वर्णन है, अर्थात माता-पिता को छोड़ना और वन के कष्ट सहना।
विकल्प (4) में राम अपनी व्याकुलता प्रकट करते हैं और लक्ष्मण को उठने के लिए पुकारते हैं।
इनमें प्रेम का भाव सीधे लक्ष्मण के स्वभाव के रूप में उतना स्पष्ट नहीं है जितना विकल्प (2) में।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (2) – सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा ......
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Question: 5

काव्यांश का केंद्रीय भाव है –

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देखिए कि पूरे काव्यांश में कौन बोल रहा है और उसका स्वर कैसा है।
  • लक्ष्मण के शोक में डूबे राम के विलाप का वर्णन करना
  • दुख की स्थिति के प्रभाव का वर्णन करना
  • राम के निर्मल और उदात्त चरित्र का वर्णन करना
  • लक्ष्मण द्वारा राम के लिए किए गए त्याग का वर्णन करना
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह काव्यांश तुलसीदास के रामचरितमानस से लिया गया है और आरोह भाग 2 के पाठ ‘लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप’ में संकलित है।
लक्ष्मण को शक्तिबाण लगा है, वे मूर्च्छित हैं। हनुमान संजीवनी लेकर अब तक नहीं लौटे।

चरण 2: काव्यांश का मुख्य भाव:
पहली ही पंक्ति कहती है कि राम लक्ष्मण को देखकर ‘मनुज अनुसारी’ अर्थात मनुष्य की तरह वचन बोले।
आगे की सभी पंक्तियों में राम भाई के गुण याद करके रोते हैं और उसे उठने के लिए पुकारते हैं।
अतः पूरा काव्यांश लक्ष्मण के शोक में डूबे राम के विलाप का चित्र है।

चरण 3: अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
विकल्प (2) बहुत सामान्य है, किसी विशेष व्यक्ति के दुख की बात नहीं करता।
विकल्प (3) में राम के उदात्त चरित्र का वर्णन कहा गया है, जबकि यहाँ राम का मानवीय, शोकाकुल रूप दिखाया गया है।
विकल्प (4) में केवल लक्ष्मण का त्याग है, जो एक पंक्ति का भाव है, पूरे काव्यांश का केंद्रीय भाव नहीं।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (1) – लक्ष्मण के शोक में डूबे राम के विलाप का वर्णन करना।
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