Question:

जो समझता है कि वह दूसरों का उपकार कर रहा है वह अबोध है, जो समझता है कि दूसरे उसका अपकार कर रहे हैं वह भी बुद्धिहीन है। कौन किसका उपकार करता है, कौन किसका अपकार कर रहा है? मनुष्य जी रहा है, केवल जी रहा है; अपनी इच्छा से नहीं, इतिहास-विधाता की योजना के अनुसार। किसी को उससे सुख मिल जाए, बहुत अच्छी बात है; नहीं मिल सका, कोई बात नहीं, परंतु उसे अभिमान नहीं होना चाहिए। सुख पहुँचाने का अभिमान यदि गलत है तो दुख पहुँचाने का अभिमान तो नितरां गलत है।

Show Hint

पहले 'कुटज' निबंध और लेखक का नाम लिखिए, फिर उपकार और अपकार के अभिमान की निरर्थकता लगभग 100 शब्दों में समझाइए।
Updated On: Oct 21, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह गद्यांश हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रसिद्ध निबंध 'कुटज' से लिया गया है। लेखक कुटज के जीवन से सीख लेकर बताता है कि मनुष्य को अपने उपकार या अपकार का अभिमान नहीं करना चाहिए।

चरण 2: व्याख्या:
लेखक कहता है कि जो यह सोचता है कि मैं दूसरों का भला कर रहा हूँ, वह अबोध है। जो यह सोचता है कि दूसरे मेरा बुरा कर रहे हैं, वह भी नासमझ है। सच यह है कि कौन किसका उपकार करता है और कौन किसका अपकार, यह कहा नहीं जा सकता।
मनुष्य केवल जी रहा है। उसका जीवन उसकी अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि इतिहास-विधाता की योजना से चलता है। यदि उसके कारण किसी को सुख मिल जाए तो यह अच्छी बात है, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। पर उसे घमंड नहीं करना चाहिए। लेखक कहता है कि सुख देने का घमंड गलत है तो दुख देने का घमंड और भी गलत है।

चरण 3: विशेष:
भाषा तत्सम शब्दों से भरी है। प्रश्नात्मक और चिंतनशील शैली में निरभिमान जीवन का संदेश दिया गया है।

अंतिम उत्तर:
गद्यांश का संदेश है कि मनुष्य को न उपकार का गर्व करना चाहिए, न अपकार का। वह तो विधाता की योजना में जी रहा है।
Was this answer helpful?
0
0

Top CBSE CLASS XII Hindi Elective Questions

View More Questions

Top CBSE CLASS XII हज़ारी प्रसाद द्विवेदी — कुटज Questions

View More Questions