Question:

पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
(घ) 'प्रभुता' और 'सनेह' शब्दों के अर्थ लिखिए।

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

शब्दार्थ:
प्रभुता = स्वामित्व/अधिकार जताने की भावना; सनेह = स्नेह, प्रेम।
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