पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
उत्तर: नायिका पति को यात्रा पर जाने से रोकने में प्रभुता नहीं मानती — वह ऐसा मानती है कि पति को रोकना उन पर अपना अधिकार जताना होगा, इसलिए वह रोकने से बचती है।