हरषि राम भेटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।
तुरत बैद तब कीन्हि उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषाद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।
राम ने हनुमान के प्रति कृतज्ञता क्यों प्रकट की ?
भालू और कपि समूह की प्रसन्नता का कारण था –
रावण द्वारा कौन-सा वृत्तांत सुना गया ?
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कथन : दुखी रावण बार-बार सिर धुन कर पछता रहा था।
कारण : विजय की आशाओं पर पानी फिरता दिख रहा था।
व्याकुल रावण कुंभकरण के पास क्यों गया होगा ?